( सादर समीक्षार्थ समर्पित)
**********************************
विजय विश्वास लिए, राम रस पान किए
भक्ति विधान का जरा, मार्ग ढूंढ आईए।
दिन रात आठों याम, राम राम लिए नाम
गाईये भजन कोई , औरों से गवाईए।
हो दिव्य साधना तेरी , है बज रही बांसुरी
धरिए ध्यान राम का, महा सुख पाइये।
राम गुण राम धुन , राम बोल राम सुन
प्रतिमा राम सीता की , मन मे बसाइये ।
– अमित पाठक शाकद्वीपी
No comments:
Post a Comment