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Sunday, May 14, 2023

माँ तेरी याद आती है


कुछ पाने में खोने में , तेरी याद आती है
अकेलेपन में विराने में , तेरी याद आती है

अश्क़ आँखों में होते हैं , तड़पता है मेरा सीना 
जब बातों ही बातों में , तेरी कोई बात आती है

जब होता हूँ बहुत खुशहाल , तो तेरी याद आती है
कभी परेशान करता है कोई सवाल , तो तेरी याद आती है

बैठता हूँ पूजा पर या मेले में जाता हूँ
देखकर माँ दुर्गा की मूरत , माँ तेरी याद आती है

भवन बेशक बनाया है , है परिवार का भी सुख
मगर देखकर तेरा कमरा , तुम्हारी याद आती है

नहीं है रोक टोक कोई , है सुखमय सी आजादी 
मगर जब सुझाव लेना हो , तो तेरी याद आती है

कभी तन्हा जो मैं बैठु , तेरी तस्वीर को देखूं
उसपल में माँ तेरी बोहोत याद आती है 
 - अमित पाठक

शकुंतला दुष्यंत

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