उस दिव्य प्रकाश का,
जिसने रास्ता दिखा दिया
तिमिर को संन्यास का।
क्या अद्भुत दृश्य था
उस पल आकाश का,
आगमन जब हुआ
नव प्रभात में उजास का।
धारण किया था गगन ने
कुछ लाल लिबास सा,
सुशोभित था वर्णक्रम भी
ज्यों अनुप्रास सा।
उस प्रभा के तेज पुंज में
कुछ तो था खास सा,
मैं देखता गया एकटक
मानो बदहवास सा।।
– अमित पाठक शाकद्वीपी
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