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भारत मां के दिल की धड़कन, पुरवइया बयार हूँ,
मां सीता की जन्मस्थली, ज्ञान धरा साकार हूँ।
पग पग भूमि धर्म धरोहर, इतिहास का मैं आधार हूँ
परिचय मेरा दुनियां जानें, हां जी हां मैं बिहार हूँ।
मौर्य वंश के शौर्य में मैं हूं, अशोक का मैं ललकार हूं,
नीति में हूं चाणक्य की, विद्यापति का व्यवहार हूं,
राजनीति में राज इंद्र सा, बिस्मिल्लाह का स्वर झंकार हूं,
परिचय मेरा दुनियां जानें, हां जी हां मैं बिहार हूँ।
दिए हिंदी को मैंने ‘दिनकर’, रामवृक्ष और रेणु फणीश्वर,
फिल्म जगत के कई धुरंधर, सेवा में पाठक बिंदेश्वर।
देश समग्र है भैया बोले, ज्यों सबका मैं परिवार हूं,
परिचय मेरा दुनियां जानें, हां जी हां मैं बिहार हूँ।
वीर कुंवर की कटी भुजा संग, बहती गंगा की धार हूं,
महावीर के तप में तपता, बुद्ध का बौध विहार हूं,
झुक कर छू लूं चरण तुम्हारे, यूं झुकने को भी तैयार हूं,
परिचय मेरा दुनियां जानें, हां जी हां मैं बिहार हूँ।
गुरु गोविन्द के रज से पावन, देव सूर्य मन्दिर मनभावन,
आर्यभट्ट के शोध में शोभित, बोली यहां की करें मन मोहित,
उदयमान हूं सूरज सा अब, छठ का पावन त्योहार हूं,
परिचय मेरा दुनियां जानें, हां जी हां मैं बिहार हूँ।
© अमित पाठक शाकद्वीपी
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