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Wednesday, March 27, 2024

नई शुरुआत

नई शुरुआत
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भूल कर रंजिश पुरानी,
चल नई शुरुआत कर,
छोड़ दो न द्वेष मन के,
खुद को फिर से साथ कर।

दिल के सारे बोझ त्यागो,
फिर से मुझसे बात कर,
थाम लूं तेरी कलाई मैं,
तू भी मेरा हाथ धर।

जानें क्यूं रूठी थी किस्मत
हम जुदा जब हों गए,
तुम भी खो गए थे कहीं
और हम भी थे तन्हा हो गए।

फिर से सुनूं मैं सुकूं से तुमको,
पहले सा बस आवाज़ कर,
बिसार कर बातें पुरानी
कुछ तो नया आगाज़ कर।

दोनों की मंजिल एक है,
राहों को साझा आज कर,
फिर से जो हम तुम मिले है,
इसी पे अब तो नाज़ कर।

भूल कर रंजिश पुरानी,
चल नई शुरुआत कर,
छोड़ दो न द्वेष मन के,
खुद को फिर से साथ कर।

© अमित पाठक शाकद्वीपी 

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