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Saturday, March 23, 2024

स्वपरिचय

उत्पत्ति मेरी ब्रह्म से, मैं भास्कर का अंश हूं,
शाकद्वीपी कुल मे जन्मा, मैं ब्राह्मणों का वंश हूं।

भाल पर तिलक मेरे, रुद्राक्ष कंठ हार है,
शोभित है तन पे यज्ञोपवित, वेद पाठ का अधिकार है।

कई रूप में क्रियान्वन, कई रूप से जीविका मेरी,
अध्ययन अध्यापन में लीन हूं, किताबें ही प्रेमिका मेरी।

शौक से लिखता हूं, कभी भाव मन के तौल कर,
जाहिर नहीं होते कभी, जो शब्द कहीं बोल कर।

अमित नाम को सार्थक करने का प्रयास हैं,
सहयोग की ही भावना का किया नित अभ्यास है।

पुस्तकों से जो संबंध है मित्रवत रहा,
उन्ही लगाव के लिए प्रकाशन में लगा रहा।

अब साथ है जब सबका तो ये भी चमत्कार है,
हूं मंच का मैं प्रतिनिधि जिसका हर सद्स्य कलमकार है।

© अमित पाठक शाकद्वीपी 

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