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Friday, February 16, 2024

ऐसे है मेरे श्याम

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शकुंतला दुष्यंत

कितना बेहतर जीवन था, दिन थे कितने गुलजार। उपवन बीच बसेरा अपना, पुष्पों की थी सजी बहार।। आए एकदिन राजकुंवर फिर करने को था रहा शिक...