अधरन पर मुस्कान गजब की,
सीधा सरल श्रृंगार है,
सुंदर मुख पर पुष्प सजाकर
करती यूं मनुहार है।
प्रकृति बीच खड़ी वो इस पल
नैनो से करती वार है,
भृकुटी बीच जो बिंदी लगी है,
उसका भी असर अपार है।
नैनन में काजल की बदरी,
लाली का भी व्यवहार है,
ऐसी मधुर मनोहर सादगी,
जिनसे उनको प्यार है।
रूप रंग में हर क्षण सुंदर,
अंग अंग सुकुमार है,
सचमुच उसकी अद्भुत किस्मत,
जो इनका हकदार है।
© अमित पाठक शाकद्वीपी
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