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Monday, June 3, 2024

प्रभु श्री कृष्ण

कितना सुंदर रूप मनोहर मन को हरता जाता है,
जो देखें ये छवि निराली भव सागर तर जाता है।

मुख मंडल पर दिनकर सा यूं तेज बिखरता जाता है,
मानो सूरज इन किरणों से प्रभु का रूप सजाता है।

मृदुल मृदुल वंशी की धुन पर सारे जग को मोह लिया,
वंशी वाले ने जन-जन को जाने कितना स्नेह दिया।

बनकर ग्वाला गाय चराई, गोपो का उद्धार किया,
हाय द्वारिकाधीश वो सुंदर, ग्रामीण जीवन स्वीकार किया।

नेह लगाया राधिका से, प्रेम का यूं विस्तार दिया, 
प्रेम के बंधन में ही बंध कर, मीरा को भी तार दिया।

जिनके नैनन शशि दिवाकर, ज्योत अखंड परिपूर्ण करें,
मानो दर्शन देकर प्रभु जी, सबका जीवन सम्पूर्ण करें।

जैसे नीलमणि सम सुन्दर, तन की शोभा महती है,
हृदय निरंतर राधा राधा, बस राधा राधा कहती है।

शब्द सीमित में उनका वर्णन कर पाना तो मुश्किल है,
यूं समझो के लेखनी मेरी प्रभु सेवा में शामिल है।

© अमित पाठक शाकद्वीपी 

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