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Friday, January 5, 2024

अख़बार के पन्नो पर...स्याही सा बिखरा मैं भाग 2

*प्रेम का असर

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आशाओं के अंकुर

कागा जैसा रूप मिला,  और वाणी जैसे दादुर। पर अपनी मस्ती में  रहते वीर बहादुर।। इक इक कर सब साथ छूट गए, होते गये सभी दूर। अनगिनत च...