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Sunday, October 29, 2023

प्रेम का असर

तुम जब आओगे
हम बातें हज़ार करेंगे
होठों से नही 
नैनो से यार करेंगे
बड़ा दिन हुआ 
नही देखा जी भर के तुझे 
इस बार मन भर दीदार करेंगे

ख़ुद की सीमाओं से मुक्त होकर
तुझमें समा जाऊं 
कहो आख़िर 
तेरे कितने करीब आऊं?

तुम सा ख़ूबसूरत नही देखा, 
जिसने तुम्हें नही देखा
उसने भला क्या देखा??

मैं अपनी बात रखने में हिचकिचाता नहीं हूं 
जैसा मैं हूं ही नहीं वैसा नजर आता नहीं हूं 
बनावटी असर से कोशो दूर हूं मैं 
मैं अपने दिल का तूझसे छिपाता नहीं हूं।

पूर्ण हो पुर्णिमा की चांद सी 
हो सरल भी मध्य रात सी 
सुकून जो घोल दे कानों में 
हैं खासियत तुम में ऐसे ही किसी बात सी।

किसी सुनसान सड़क पर एक बार मिलते 
बेफिक्र बेपनाह कभी तो यार मिलते 
मिलते ऐसे ही कि दिल को तलब हो 
यार ऐसे ही क्यों नहीं बार बार मिलते।
         – अमित पाठक शाकद्वीपी 

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