हमे खुस देखकर वो हँसती है
माँ हमारे सारे दुःख हर लेती है
बीमार होती तो भी सारे काम कर लेती है
अपनी ख्वाहिशों को छोड़कर हमारे ख़्वाव पुरे करती है
खुद की जान दाव पर लगा हमे जन्म देती है
स्वयं भूखी रह जाती है हमे पेट भर खिलाती है
अपने गोद में रखकर सर हमे माँ सुलाती है
हैरान हूँ मैं माँ कभी पढ़ी नहीं अक्षरों से लड़ी नहीं
पर हमारी हर धड़कन को पल में पढ़ जाती है
बिन कहे हमारी हर बात जान लेती है
हम खुश रहे इसलिए तकलीफों में भी मुस्कुराना मान जाती है
हालातों से हार कर जुबाँ जब साथ नहीं देती
दर्द पहचान ले कोई तो बस माँ होती है
माँ प्रेम की काया है
तपती धूप में छाया है
लाखों दुःख सहकर भी हमें संभाला है
आँचल में छिपाकर प्यार से पाला है
स्वयं पढ़कर हमे पढ़ना सिखाया है
हालातों से हमे लड़ना सिखाया है
अनुभवों से अपनी हमे अच्छे बुरे का भेद बताया है
झेलकर कष्ट भी हमे आगे बढ़ाया है
मेरी हर गलती माँ ने बड़े प्यार से समझाया है
कठिनाइयों का सामना करना भी माँ ने सिखाया है
हमे झुकने न दिया उसने कभी
दे कर कलम तकदीर लिखने का हुनर बताया है
उसने अपने ज्ञान से दिखाया मंजिल का रास्ता
माँ ही है जिसने हमे इतना कामयाब बनाया है
- एकता पाठक
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